बच्चों के विकास के सिद्धांत (Principles of Development of Children) – CTET Notes in Hindi
परिचय (Introduction)
बच्चों का विकास (Child Development) बाल मनोविज्ञान और शिक्षा शास्त्र का एक महत्वपूर्ण विषय
है। इस विषय का बच्चों के शिक्षण के क्षेत्र में बहुत उपयोग होता है इसी कारण CTET
(Central Teacher Eligibility Test) में बाल विकास और शिक्षाशास्त्र (Child Development and Pedagogy - CDP) के अंतर्गत बच्चों के विकास के
सिद्धांतों से संबंधित प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।
एक शिक्षक और उसके कर्तव्य के लिए बच्चों के विकास को समझना बहुत जरूरी है क्योंकि प्रत्येक बच्चे विशिष्ट होते हैं और अलग गति, क्षमता और अनुभव के साथ विकसित होते हैं। यदि शिक्षक बच्चों के विकास के सिद्धांतों को समझता है तो वह बच्चों की सीखने की जरूरतों के अनुसार प्रभावी शिक्षण कर सकता है।
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बच्चों का विकास क्या है? (What is Child Development?)
बच्चों का विकास (Child Development) एक निरंतर और क्रमिक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से बच्चे
में शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक और भाषा
संबंधी परिवर्तन होते हैं।
यह विकास केवल बच्चे की लंबाई या वजन में वृद्धि नहीं है
बल्कि उनके सोचने, समझने, व्यवहार करने और समस्याओं को हल करने की क्षमता में होने
वाले परिवर्तन के भी विकास का हिस्सा हैं।
उदाहरण: - एक छोटा
बच्चा पहले अनुकरण से केवल सरल शब्द बोलता है, फिर धीरे-धीरे वाक्य बनाना सीखता है। इसी प्रकार उसकी सोच, तर्क क्षमता और सामाजिक व्यवहार में भी
परिवर्तन आता है।
विकास और वृद्धि में अंतर (Differences
between Growth and
Development)
मुख्यतः वृद्धि (Growth) से शारीरिक परिवर्तन का पता चलता है जबकि विकास (Development) व्यापक परिवर्तन को दर्शाता है।
कुछ बिन्दुओं में इनके मध्य अंतर समझते हैं -
वृद्धि (Growth):
·
शरीर के आकार में परिवर्तन
·
वजन और ऊंचाई में वृद्धि
·
मापने योग्य परिवर्तन
विकास (Development):
·
मानसिक क्षमता में वृद्धि
·
भाषा विकास
·
सामाजिक और भावनात्मक परिवर्तन
·
व्यवहार में परिवर्तन
इस प्रकार कहा जा सकता है कि वृद्धि विकास का एक हिस्सा है
लेकिन विकास केवल वृद्धि तक सीमित नहीं है।
बच्चों के विकास के प्रमुख
सिद्धांत (Principles of Child Development)
बाल विकास कुछ निश्चित सिद्धांतों के आधार पर होता है। ये
सिद्धांत विभिन्न प्रक्रिया और दार्शनिकों के द्वारा निर्धारित किये गये हैं। किसी
भी शिक्षक के लिए इन सिद्धांतो से बच्चों के व्यवहार और सीखने की प्रक्रिया को
समझने में सहायता मिलती है।
बच्चों के विकास के प्रमुख सिद्धांत (principles
of child development) इस प्रकार है -
1. विकास एक निरंतर प्रक्रिया है (Development is a Continuous Process)
बच्चों का विकास जन्म से शुरू होकर जीवनभर चलता रहता है।
विकास अचानक नहीं होता बल्कि धीरे-धीरे और सतत होता है।
एक बच्चा जन्म के बाद चरणबद्ध तरीके से धीरे-धीरे :
·
बैठना
·
चलना
·
बोलना
·
सोचना
·
निर्णय लेना
सीखता है।
CTET Point : शिक्षक को यह समझना चाहिए कि हर बच्चे का विकास अलग गति से हो सकता है।
2. विकास क्रमबद्ध होता है (Development is Sequential)
विकास एक निश्चित क्रम का पालन करता है। अर्थात् यह
प्रक्रिया चरणों में संपन्न होती है -
उदाहरण:- बच्चा
पहले बैठना सीखता है, फिर खड़ा होना और उसके बाद चलना सीखता
है। इसी प्रकार भाषा विकास सीखता है।
ध्वनि → शब्द → वाक्य → विचार व्यक्त करना
इस सिद्धांत के अनुसार शिक्षक को बच्चों से उनकी उम्र और
विकास स्तर के अनुसार अपेक्षा करनी चाहिए।
3. विकास सामान्य से विशिष्ट की ओर होता है (General to Specific)
बच्चे पहले सामान्य प्रतिक्रियाएं देते हैं और धीरे-धीरे
विशिष्ट कौशल सीखते हैं।
उदाहरण: छोटा
बच्चा पहले पूरे हाथ से कोई वस्तु पकड़ता है, बाद में उंगलियों से सही तरीके से पकड़ना सीखता है।
शिक्षण में इसका
उपयोग:
किसी अवधारणा के समझ के लिए पहले आसान गतिविधियां करानी
चाहिए फिर कठिन कार्यों की ओर बढ़ना चाहिए।
4. विकास की गति सभी बच्चों में अलग होती है (Individual Differences)
हर बच्चा अलग और विशिष्ट होता है।
इसको ऐसे समझें कि
कुछ बच्चे जल्दी बोलना सीखते हैं, कुछ देर से। कुछ
बच्चों की गणितीय क्षमता अच्छी होती है तो कुछ की भाषा कौशल।
इसलिए शिक्षक को
सभी बच्चों की तुलना नहीं करनी चाहिए।
CTET हेतु महत्वपूर्ण बिन्दु : "Individual Differences" बाल केंद्रित शिक्षा का आधार है।
5. विकास पर वंशानुक्रम और वातावरण दोनों का प्रभाव होता है
बच्चे का विकास
केवल आनुवंशिकता (Heredity) से नहीं होता और न ही केवल वातावरण से। दोनों
मिलकर विकास को प्रभावित करते हैं। Development is influenced by
both heredity and environment.
वंशानुक्रम:
·
शारीरिक विशेषताएं
·
कुछ प्राकृतिक क्षमताएं
वातावरण:
·
परिवार
·
विद्यालय
·
समाज
·
अनुभव
एक अच्छा और मित्रवत वातावरण बच्चे की क्षमताओं को विकसित
करने में मदद करता है।
6. विकास सभी क्षेत्रों में होता है (Multi-dimensional Development)
बच्चे का विकास सिमित नहीं होता अपितु कई क्षेत्रों में
होता है, इसके अलग अलग आयाम हैं :
- शारीरिक विकास
- मानसिक/संज्ञानात्मक विकास
- सामाजिक विकास
- भावनात्मक विकास
- नैतिक विकास
- भाषा विकास
इन सब क्षेत्रों के माध्यम से एक शिक्षक को बच्चे के
संपूर्ण विकास पर ध्यान देना चाहिए।
7. विकास सरल से
जटिल की ओर होता है (Development Proceeds from Simple to Complex)
प्रत्येक बच्चे की सीखने और विकास की प्रक्रिया सरल कार्यों से शुरू होकर धीरे-धीरे कठिन और जटिल कार्यों की ओर बढ़ती है।
उदाहरण: एक बच्चा पहले केवल आवाज निकालता है, फिर शब्द बोलना सीखता है और बाद में अपनी बात को विस्तार से व्यक्त करता है।
इसी प्रकार गणित में बच्चा पहले गिनती सीखता है, फिर जोड़, घटाव और उसके बाद कठिन गणितीय संक्रियाओं और समस्याओं को हल करना सीखता है।
CTET Point: शिक्षक को बच्चों के अनुरूप सीखने के लिए उचित क्रम (Sequence) प्रदान करना चाहिए।
8. विकास में
पूर्वानुमान लगाया जा सकता है (Development is Predictable)
बच्चों का विकास पूरी तरह अचानक नहीं होता बल्कि कुछ सामान्य पैटर्न का पालन करता है। इससे पूर्वज्ञान आधारित अनुमान लगाया जा सकता है।
जैसे:
- बच्चा पहले बैठना सीखता है
- फिर खड़ा होना
- फिर चलना
हालांकि सभी बच्चों की गति अलग हो सकती है। इसका अर्थ यह नहीं है कि
हर बच्चा बिल्कुल एक जैसा विकसित होगा बल्कि विकास की दिशा सामान्य रूप से
अनुमानित होती है।
9. विकास की दिशा
सिर से पैर की ओर होती है (Cephalocaudal Principle)
इस सिद्धांत के अनुसार बच्चे में विकास की दिशा ऊपर से नीचे की ओर होती है। अर्थात् सबसे पहले बच्चे के सिर और मस्तिष्क का नियंत्रण विकसित होता है, उसके बाद शरीर के अन्य हिस्सों का नियंत्रण विकसित होता है।
उदाहरण: बच्चा पहले सिर संभालना सीखता है, फिर बैठना और फिर चलना सीखता है।
10. विकास निकट से
दूर की ओर होता है (Proximodistal
Principle)
इस सिद्धांत के अनुसार विकास शरीर के केंद्र से बाहरी अंगों की ओर होता है। इसे ही proximodistal growth principle के नाम से जाना जाता है।
उदाहरण: बच्चा पहले पूरे हाथ से वस्तु पकड़ता है, बाद में उंगलियों की सहायता से छोटी वस्तुओं को पकड़ना सीखता है।
11. विकास एकीकृत
प्रक्रिया है (Development
is an Integrated Process)
बच्चे के शुरूआती विकास के सभी पक्ष एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। यदि बच्चे का भावनात्मक विकास अच्छा होगा तो उसके सामाजिक और शैक्षणिक विकास पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। और इन सबसे उसकी नैतिकता का विकास निर्मित होता है।
उदाहरण: आत्मविश्वासी (जिसको लगता है कि उसको वह कार्य आता है) बच्चा कक्षा में अधिक भागीदारी करता है।
12. विकास, परिपक्वता
और सीखने दोनों से प्रभावित होता है (Maturation and Learning)
बच्चे के विकास में दो मुख्य भूमिका होती है:
1. परिपक्वता (Maturation)
2. सीखना (Learning)
इसको ऐसे समझें, परिपक्वता बच्चे की प्राकृतिक जैविक वृद्धि है जबकि सीखना अनुभवों से प्राप्त व्यवहार परिवर्तन है।
CTET पॉइंट : एक शिक्षक को बच्चों की परिपक्वता के स्तर को ध्यान में रखकर शिक्षण करना चाहिए।
13. प्रत्येक विकासात्मक अवस्था की अपनी विशेषताएं होती हैं
हर उम्र के बच्चों की सोच, रुचि और सीखने की क्षमता अलग होती है। इसके कई कारण हो सकते हैं
जैसे:
प्राथमिक स्तर के बच्चे:
- खेल और गतिविधियों द्वारा सीखते हैं
- ठोस उदाहरणों से जल्दी समझते हैं
इसलिए छोटे बच्चों को केवल व्याख्यान द्वारा नहीं पढ़ाया जाना चाहिए।
बच्चों के विकास के सिद्धांत और CTET में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण विचार
बच्चे के विकास के सिद्धांत (principle of child development)
विषय की आवश्यकता को देखते हुए प्रत्येक शिक्षण पद्धति में इसको शामिल किया जाता
है, इसके लिए अलग अलग शिक्षाविदों और बालशिक्षा के विद्वानों द्वारा अवधारणाओं का
स्पष्टीकरण किया गया है -
a. जीन पियाजे (Jean Piaget) का योगदान
पियाजे के अनुसार बच्चा स्वयं अनुभवों के माध्यम से ज्ञान का निर्माण करता है। इसके अलग अवस्थाएं होती हैं।
पियाजे ने संज्ञानात्मक विकास की चार अवस्थाएं बताई:
1. संवेदी-गामक अवस्था (Sensorimotor Stage)
आयु: 0-2 वर्ष
बच्चा इंद्रियों और क्रियाओं द्वारा सीखता है।
2. पूर्व संक्रियात्मक अवस्था (Preoperational Stage)
आयु: 2-7 वर्ष
बच्चे में भाषा का विकास होता है लेकिन तार्किक सोच सीमित होती है।
3. ठोस संक्रियात्मक अवस्था (Concrete Operational Stage)
आयु: 7-11 वर्ष
बच्चा वास्तविक वस्तुओं और उदाहरणों से बेहतर सीखता है।
4. औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (Formal Operational Stage)
आयु: 11 वर्ष के बाद
बच्चा अमूर्त चिंतन कर सकता है।
CTET हेतु याद रखें: पियाजे
के अनुसार बच्चा ज्ञान का निष्क्रिय ग्रहणकर्ता नहीं बल्कि सक्रिय ज्ञान निर्माता होता
है।
b.लेव वायगोत्स्की (Lev Vygotsky) और सामाजिक विकास सिद्धांत
लेव वायगोत्स्की ने बताया कि बच्चे का विकास सामाजिक वातावरण से प्रभावित होता है। क्योंकि बच्चा सबसे पहले विस्तृत रूप से अपने समाज के संपर्क में आता है।
लेव वायगोत्स्की के अनुसार:
- भाषा सीखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- समाज और संस्कृति बच्चे के ज्ञान निर्माण को प्रभावित करते हैं।
मुख्य अवधारणा: - ZPD (Zone of Proximal Development)
अर्थात बच्चा वह कार्य जो सहायता से या किसी के समीप होने
से कर सकता है।
शिक्षक की भूमिका: बच्चे को सहायता (Scaffolding) देना।
c. लॉरेंस कोहलबर्ग (Kohlberg) का नैतिक विकास सिद्धांत
कोहलबर्ग ने अपने अध्ययन के आधार पर नैतिक विकास को तीन स्तरों में बांटा है :
1. पूर्व पारंपरिक स्तर
बच्चा कार्यों पर दंड और पुरस्कार के आधार पर निर्णय लेता है।
2. पारंपरिक स्तर
बच्चा समाज और सामाजिक नियमों को महत्व देता है।
3. उत्तर पारंपरिक
स्तर
बच्चे विकसित होकर व्यक्ति के रूप में नैतिक सिद्धांतों के आधार पर निर्णय लेता है।
CTET Point: नैतिक विकास केवल उम्र से नहीं बल्कि अनुभव और सामाजिक
वातावरण से प्रभावित होता है।
बच्चों के विकास के सिद्धांतों
का शिक्षण में महत्व (Importance of Principles of Child Development in
Teaching)
एक शिक्षक के लिए बच्चों के विकास के सिद्धांतों को समझना बहुत आवश्यक है
क्योंकि इससे शिक्षक बच्चों की सीखने की क्षमता और जरूरतों को बेहतर तरीके से समझ
पाता है।
बाल विकास के
सिद्धांतों की सहायता से शिक्षक:
- बच्चों के
व्यवहार को समझ सकता है।
- उचित शिक्षण विधि
का चयन कर सकता है।
- व्यक्तिगत
भिन्नताओं को पहचान सकता है।
- बच्चों की
समस्याओं का समाधान कर सकता है।
- सीखने का
सकारात्मक वातावरण बना सकता है।
शिक्षक की भूमिका (Role
of Teacher in Child Development)
बाल विकास में शिक्षक की भूमिका केवल ज्ञान देने तक सीमित नहीं होती बल्कि
शिक्षक बच्चे के संपूर्ण विकास में सहायता करता है। एक सच्चा शिक्षक बच्चों को
पहचान कर उनके लिए उचित अधिगम प्रक्रिया का उपयोग करता है।
शिक्षक की भूमिका का को निम्न बिन्दुओं से
समझते हैं –
1. मार्गदर्शक और सहायक की भूमिका –
शिक्षक को बच्चों को सीखने के अवसर प्रदान करने चाहिए। शिक्षक
को ऐसा वातावरण बनाना चाहिए जहां बच्चा प्रश्न पूछ सके, प्रयोग कर सके और अपनी गलतियों से सीख सके।
2. व्यक्तिगत भिन्नताओं को समझना
हर बच्चा अलग होता है। कुछ बच्चे जल्दी सीखते हैं जबकि कुछ
बच्चों को अधिक समय और सहायता की आवश्यकता होती है।
एक अच्छा शिक्षक सभी बच्चों की भावनाओं,
अभिव्यक्तियों और क्षमताओं का सम्मान करता है।
3. बाल केंद्रित शिक्षण अपनाना
आधुनिक शिक्षा में बच्चा शिक्षण प्रक्रिया का केंद्र होता
है। शिक्षक को अपने अधिगम कार्यों को बच्चों को केन्द्र में रखकर पूर्ण करना चाहिए।
प्रत्येक शिक्षक को चाहिए कि वे :
- गतिविधि आधारित शिक्षण
- अनुभव आधारित शिक्षण
- खेल आधारित शिक्षण
का प्रयोग करे ।
विकास और सीखने का संबंध (Relationship Between Development and Learning)
Ø विकास और सीखना एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
Ø विकास बच्चे की क्षमता को बढ़ाता है और सीखना
उस क्षमता को और विकसित करता है।
उदाहरण: एक बच्चा
जैसे-जैसे मानसिक रूप से विकसित होता है, वह कठिन
अवधारणाओं को समझने में सक्षम होता जाता है।
CTET Important Point: सीखना और विकास
अलग-अलग प्रक्रियाएं नहीं हैं बल्कि दोनों एक-दूसरे को प्रभावित करती हैं।
बाल विकास के सिद्धांतों पर आधारित शिक्षण रणनीतियां
बाल विकास के सिद्धांतों का शिक्षण अधिगम
में उपयोग करने के लिए कुछ रणनीतियां बनाई जाती है, जो इस प्रकार है -
1. अनुभव आधारित सीखना
बच्चे करके अधिक सीखते हैं। इसलिए शिक्षक को प्रयोग,- गतिविधियां,- प्रोजेक्ट कार्य कराने
चाहिए।
2. सहयोगात्मक अधिगम
(Cooperative
Learning)
बच्चे दूसरों के साथ मिलकर और आपसी सहयोग से बेहतर सीखते हैं। कक्षा में समूह
कार्य द्वारा बच्चों में सामाजिक कौशल, सहयोग, संवाद क्षमता विकसित करता है।
3. प्रेरणा आधारित शिक्षण
सीखने के लिए बच्चों में रुचि और प्रेरणा होना जरूरी है। शिक्षक को बच्चों को
प्रोत्साहित करना चाहिए।
CTET परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण बिंदु
1. विकास जन्म से शुरू होकर
जीवनभर चलता है।
2. प्रत्येक बच्चा अलग गति
से विकसित होता है।
3. विकास पर वंशानुक्रम और
वातावरण दोनों का प्रभाव पड़ता है।
4. बच्चा ज्ञान का सक्रिय
निर्माता है।
5. सीखना अनुभव और अभ्यास पर
आधारित है।
6. गलतियां सीखने की
प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
7. शिक्षक की भूमिका सहायक
और मार्गदर्शक की होती है।
8. बाल केंद्रित शिक्षा में
बच्चा मुख्य होता है।
9. विकास बहुआयामी प्रक्रिया
है।
10. बच्चों की तुलना नहीं
करनी चाहिए।
CTET में पूछे जाने वाले संभावित प्रश्न
प्रश्न 1: विकास की प्रकृति कैसी होती है?
उत्तर: निरंतर और
क्रमिक।
प्रश्न 2: बच्चा सबसे अच्छा कैसे सीखता है?
उत्तर: सक्रिय
अनुभव और गतिविधियों द्वारा।
प्रश्न 3: विकास को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक कौन
से हैं?
उत्तर: वंशानुक्रम
और वातावरण।
प्रश्न 4: बच्चे की गलतियों को कैसे देखना चाहिए?
उत्तर: सीखने के
अवसर के रूप में।
प्रश्न 5: बाल केंद्रित शिक्षा में केंद्र कौन होता है?
उत्तर: बच्चा।
निष्कर्ष (Conclusion)
बच्चों के विकास के सिद्धांत (principle of child development), बाल मनोविज्ञान और शिक्षण प्रक्रिया का आधार हैं। एक
प्रभावी शिक्षक वही है जो बच्चों के विकास की विभिन्न अवस्थाओं, उनकी क्षमताओं और व्यक्तिगत को पहचान सके और
उनमें अंतर को समझ सके।
बाल विकास को समझने से शिक्षक बच्चों के लिए बेहतर शिक्षण वातावरण तैयार कर
सकता है और उनकी सीखने की क्षमता को बढ़ा सकता है। इससे अधिगम प्रतिफल उच्च
प्राप्त हो सकते हैं।
CTET परीक्षा के लिए
यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि बाल विकास और शिक्षाशास्त्र के प्रश्नों में
विकास के सिद्धांतों से सीधे और अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं।
इसलिए अभ्यर्थियों को विकास के सभी सिद्धांतों को उदाहरण सहित समझना चाहिए।
बच्चों के विकास के
सिद्धांत (Principles
of Development of Children) FAQ
प्रश्न 1. बच्चों का विकास क्या है?
उत्तर - बच्चों का विकास एक निरंतर प्रक्रिया है जिसमें बच्चे के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक और भाषा संबंधी बदलाव होते हैं।
प्रश्न 2. बच्चों का विकास कब शुरू होता है?
उत्तर - बच्चों का विकास जन्म से पहले ही शुरू हो जाता है और जीवनभर चलता रहता है।
प्रश्न 3. विकास और वृद्धि में क्या अंतर है?
उत्तर - वृद्धि मुख्य रूप से शारीरिक परिवर्तन को दर्शाती है जबकि विकास बच्चे के संपूर्ण व्यक्तित्व में होने वाले बदलाव को दर्शाता है।
प्रश्न 4. बच्चों के विकास का पहला सिद्धांत क्या है?
उत्तर - बच्चों के विकास का प्रमुख सिद्धांत है कि विकास एक निरंतर और क्रमिक प्रक्रिया है।
प्रश्न 5. क्या सभी बच्चों का विकास समान गति से होता है?
उत्तर - नहीं, प्रत्येक बच्चा अपनी क्षमता और वातावरण के अनुसार अलग-अलग गति से विकसित होता है।
प्रश्न 6. विकास को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक कौन से हैं?
उत्तर - विकास को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक वंशानुक्रम (Heredity) और वातावरण (Environment) हैं।
प्रश्न 7. बाल विकास के कितने प्रमुख क्षेत्र होते हैं?
उत्तर - बाल विकास के प्रमुख क्षेत्र हैं:- शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, भावनात्मक, भाषा और नैतिक विकास।
प्रश्न 8. विकास सरल से जटिल की ओर कैसे होता है?
उत्तर - बच्चे पहले सरल कार्य सीखते हैं और धीरे-धीरे कठिन तथा जटिल कार्यों को सीखते हैं।
प्रश्न 9. बाल विकास में शिक्षक की भूमिका क्या होती है?
उत्तर - शिक्षक की भूमिका मार्गदर्शक, सहायक और सीखने का वातावरण बनाने वाले व्यक्ति की होती है।
प्रश्न 10. बाल केंद्रित शिक्षा क्या है?
उत्तर - बाल केंद्रित शिक्षा में बच्चा शिक्षण प्रक्रिया का मुख्य केंद्र होता है और शिक्षक सहायक की भूमिका निभाता है।
प्रश्न 11. पियाजे के अनुसार बच्चा कैसे सीखता है?
उत्तर - पियाजे के अनुसार बच्चा अनुभवों के माध्यम से स्वयं ज्ञान का निर्माण करता है।
प्रश्न 12. वायगोत्स्की का विकास सिद्धांत क्या बताता है?
उत्तर - वायगोत्स्की के अनुसार सामाजिक वातावरण और भाषा बच्चे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
प्रश्न 13. ZPD (Zone of Proximal Development) किसने दिया?
उत्तर - ZPD की अवधारणा लेव वायगोत्स्की ने दी थी।
प्रश्न 14. कोहलबर्ग किस विकास से संबंधित हैं?
उत्तर - कोहलबर्ग नैतिक विकास (Moral Development) के सिद्धांत के लिए प्रसिद्ध हैं।
प्रश्न 15. बच्चों की गलतियों को कैसे देखना चाहिए?
उत्तर - बच्चों की गलतियों को सीखने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा और सीखने का अवसर समझना चाहिए।
प्रश्न 16. सीखने और विकास में क्या संबंध है?
उत्तर - सीखना और विकास एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं। सीखना बच्चे के विकास को बढ़ाता है।
प्रश्न 17. व्यक्तिगत भिन्नता का क्या अर्थ है?
उत्तर - व्यक्तिगत भिन्नता का अर्थ है कि प्रत्येक बच्चा क्षमता, रुचि और सीखने की गति में अलग होता है।
प्रश्न 18. विकास का सिर से पैर की ओर सिद्धांत क्या कहलाता है?
उत्तर - सिर से पैर की ओर विकास को Cephalocaudal Principle कहा जाता है।
प्रश्न 19. विकास केंद्र से बाहरी अंगों की ओर किस सिद्धांत के अनुसार होता है?
उत्तर - यह Proximodistal Principle कहलाता है।
प्रश्न 20. CTET में बच्चों के विकास के सिद्धांत क्यों महत्वपूर्ण हैं?
उत्तर - CTET परीक्षा में Child Development and
Pedagogy विषय के अंतर्गत विकास के
सिद्धांतों से कई प्रश्न पूछे जाते हैं इसलिए यह टॉपिक बहुत महत्वपूर्ण है।
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